सोमवार, 12 मार्च 2012

बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना

बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखना 
मैं समन्दर देखती हूँ तुम किनारा देखना 
यूँ बिछड़ना भी बहुत आसाँ न था उस से मगर 
जाते जाते उस का वो मुड़ के दुबारा देखना 
किस शबाहत को लिये आया है दरवाज़े पे चाँद 
ऐ शब-ए-हिज्राँ ज़रा अपना सितारा देखना 
आईने की आँख ही कुछ कम न थी मेरे लिये 
जाने अब क्या क्या दिखायेगा तुम्हारा देखना 
                   - परवीन शाकिर 

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