दीवारें बनाता ये बचपन कहीं इस दीवार में गुम न हो जाये
फूल सा कोमल ये मन कहीं पत्थर सा कठोर न बन जाये
धूल और सीमेंट की परतों ने इसे दानव सा जकड़ रखा है
किताबें थामने वाले हाथों ने ईंटों का बोझ उठा रखा है
अस्थिर मन है इसका पर एक स्थिर दीवार बनाता है
मन के अँधेरे में उज्जवल भविष्य की आस बनाता है
--अनकही
फूल सा कोमल ये मन कहीं पत्थर सा कठोर न बन जाये
धूल और सीमेंट की परतों ने इसे दानव सा जकड़ रखा है
किताबें थामने वाले हाथों ने ईंटों का बोझ उठा रखा है
अस्थिर मन है इसका पर एक स्थिर दीवार बनाता है
मन के अँधेरे में उज्जवल भविष्य की आस बनाता है
--अनकही

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